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झारखण्ड : निर्माणाधीन RBB हाईस्कूल राजगंज पहुँची ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन झारखंड की टीम, काम में लापरवाही और अनमियता की मिली थी जानकारी।

समाचार पत्र के माध्यम से Helping Human Rights Foundation झारखण्ड स्टेट प्रेसिडेंट आमिर नदीम अंसारी को पता चला की RBB हाई स्कूल राजगंज धनबाद में विकास कार्यों में लापरवाही के साथ अनमियता बरती जा रही है। तो मामले को अपने संज्ञान में लेने के बाद आमिर नदीम अंसारी HHRF के RTI एक्टिविस्ट शंकर महतो जी के साथ स्कुल में पहुंच गए और वहाँ के ठेकेदार राज बिहारी सिंह और bccl के इंजीनियर पुनीत सिन्हा से बात हुई।

ठेकेदार और इंजीनियर ने बताया की अभी तो काम चल रहा है, पूरा काम होने के बाद हेल्पिंग ह्यूमन झारखंड टीम को सुचना दे दी जाएगी उसके बाद आप आकर देखना की जो आपसे शिकायत की हैं वो कार्य अपने मनको के अनुशार हुआ हैं या नहीं। सिन्हा जी ने कहा जब हम आपको खुद बुलाने की बात कह रहे हैं तो काम में लफरवाही हमारे लिए रखना मुमकिन नहीं हैं जितना होगा हम काम को और अच्छे व् बेहत्तर तरीके से जल्द पूरा कर देंगे।

ठेकेदार ने सब निर्माणाधीन जगह को दिखाया साथ ही निर्माणधीन सभी कार्य स्थलों का खुद आमिर जी और शंकर जी ने मुआवना किया। अभी फिलहाल सबकुछ वहाँ पे ठीक और सही तरीके से चल रहा हैं । आमिर जी ने कहा कि शिक्षा का मंदिर बन रहा है उम्मीद है इस मंदिर को अच्छे से बनाएंगे। जिसमे हमारे देश के बच्चों का उज्वल भविष्य बनेगा। ठेकेदार ने भी आश्वासन के साथ कहा आप बिल्कुल चिंता न करें सबकुछ अच्छे से बनाएंगे। ठेकेदार ने कहा हमें पता हैं की आगे अगर कुछ गड़बड़ी पाई गई तो उसे देखने के लिए और उसपर कार्यवाही कराने के लिए हेल्पिंग ह्यूमन झारखंड हमारे सामने खड़ी हैं जो हमेशा लोगो की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं

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फर्रुखाबाद: दुष्कर्मी पिता ने ही अपनी नाबालिग बेटी की तार तार की आबरू, माँ और मामा ने दर्ज की शिकायत।

फर्रुखाबाद में पुत्री के साथ दुष्कर्म करने और दोस्तों से भी कराने के आरोप में फंसे लेखपाल की गिरफ्तारी को पुलिस की टीमों ने दबिश दी। इसकी भनक लगते ही लेखपाल अपने एक खास साथी के साथ फरार हो गया है। एसपी ने कोतवाल को तलब कर 24 घंटे के अंदर आरोपी की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं।मुकदमे के विवेचक ने महिला सिपाही से पीड़ित पुत्री के बयान दर्ज करवाए हैं। एक महिला ने फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र की चौकी कर्नलगंज के एक मोहल्ला निवासी लेखपाल पति और उसके दोस्तों पर नाबालिग पुत्री से दुष्कर्म करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपी लेखपाल की तलाश में पुलिस की कई टीमों ने सोमवार को दबिश दी।आरोपी लेखपाल अपने दोस्त के साथ फरार हो गया है। एसपी डॉ अनिल मिश्रा ने सोमवार को कोतवाल जसवंत सिंह व सीओ मन्नी लाल गौंड को तलब कर अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। कोतवाल ने बताया कि आरोपी की तलाश की जा रही है। विवेचना कर रहे दरोगा धर्मेंद्र यादव को एसपी ने शीघ्र पीड़िता का बयान दर्ज कर मेडिकल करवाकर चार्जशीट दाखिल करने के आदेश दिए हैं।

एसपी ने लेखपाल को पकड़ने के लिए कोतवाल के अलावा स्वाट टीम को लगाया है। पुलिस ने लेखपाल के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगवाकर उसकी खोजबीन शुरू कर दी है।  सूत्रों के अनुसार रविवार को लेखपाल शहर में ही घूमते देखा गया। पुलिस चाहती तो मुकदमा दर्ज होने से पहले ही उसको पकड़ सकती थी।पुलिस ने हीलाहवाली बरती और आरोपियों को भागने का मौका दिया। विवेचक ने महिला सिपाही सांत्वना यादव से पीड़ित छात्रा के बयान दर्ज करवाए। उस दौरान छात्रा की मां उसके साथ मौजूद रही। कोतवाल ने बताया कि पुलिस की कई टीमें काम कर रही है। शीघ्र ही लेखपाल को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

लेखपाल ने मुकदमा दर्ज होने के बाद अपने साले व सहायक बैंक मैनजर की पत्नी के व्हाट्सएप पर रविवार की रात मैसज भेजा। इसमें लिखा कि मेरी मौत के जिम्मेदार जिले के एक अधिकारी, मेरी पत्नी, पुत्री व मेरा साला होगा। सोमवार को कोतवाली आए पीड़िता के मामा ने पुलिस को इस बारे में जानकारी दी।
आरोपी लेखपाल को जब पता चला कि साले व पत्नी ने पुत्री को साथ ले जाकर महिला आयोग की सदस्य व एसपी से उसकी शिकायत की है तो उसने 29 दिसंबर को साले के घर पर हमला कर दिया थ। साले के घर के बाहर खड़ी कार तोड़ दी और पिस्टल निकालकर जान से मारने के लिए दौड़ा था। सलहज ने पति को कमरे में बंद कर ताला डाल दिया। लेखपाल काफी देर तक हंगामा करता रहा और साले को गोली से मारने की धमकी दी।

इस मामले में साले ने रिपोर्ट दर्ज करने के लिए आनलाइन प्रार्थना पत्र दिया। पुलिस अब तक प्रकरण की जांच भी नहीं पूरी कर सकी है। वहीं साले का कहना है कि वह भयभीत है। पहले पिता पर भी जानलेवा हमला लेखपाल ने किया था। उस मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। बाद में लेखपाल के जेल जाने पर समझौता कर लिया गया था। पुलिस रपोर्ट दर्ज नहीं करेगी तो वह ऊपर के अधिकारियों से गुहार लगाएगा।

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दिल्ली ओखला की मुस्लिम बस्ती में बुनियादी और जीवन की जरुरी सुविधाओं का हैं अभाव

यहां के निवासियों का कहना है कि पानी की पाइप लाइन बिछ गई है, लेकिन अभी तक सुचारु रूप से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है।

दिल्ली का ओखला का एक ऐसा मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां से दिल्ली की राजनीति में काफी अहम् और महत्वपूर्ण भूमिका रहती हैं लेकिन इस विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का एक हिस्सा पॉश इलाका कहलाता है, जिसका नाम है न्यू फ्रें ड्स कॉलोनी। यह इसी निर्वाचन क्षेत्र के दूसरे इलाके जाकिर नगर से कई मायनों में बिल्कुल अलग है। जाकिर नगर में पीने के पानी, बेहतर सड़कों और पक्की नालियों जैसी बुनियादी सुविधाओं का बहुत अभाव था।

बीते पांच वर्षो के दौरान दिल्ली सरकार ने इस निर्वाचन क्षेत्र के कई हिस्सों में पीने के पानी की आपूर्ति के लिए पाइप लाइन तो बिछा दी, लेकिन दिल्ली जल बोर्ड से जलापूर्ति नहीं हो रही है। यहां के निवासियों का कहना है कि पानी की पाइप लाइन बिछ गई है, लेकिन अभी तक सुचारु रूप से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। सीवरेज सिस्टम नहीं होने के कारण इलाके में जलभराव की समस्या है। हाजी कॉलोनी, जसोला गांव और शाहीनबाग जैसे इलाकों के लोग जलसंकट से जूझ रहे हैं। इस इलाके में बेहतर प्राथमिक शिक्षा की सुविधा की भी कोई खास अच्छी नहीं हैं इसमें अभी बहुत सुधार की जरूरत है।

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मुजफ्फरनगर रेप पीड़िता के परिवार ने पुलिस पर लगाया थाने में बुलाकर पीटने का आरोप, पीडिता ने कार्यवाही न होने पर कर ली थी आत्महत्या

पिछले साल अक्टूबर महीने के शुरुआती दिनों में मुजफ्फरनगर यूपी में एक 21 वर्षीया लड़की ने रेप और उसके बाद मिली मानसिक प्रताड़ना के चलते आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में अब एक नया मोड़ आया है जब पीड़िता के परिवार वालों ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर थाने में पीटने के आरोप लगाए हैं। इतना ही नहीं परिवार का कहना है कि यूपी पुलिस ने पिछले साल दिवाली के आस-पास भी परिवार को प्रताड़ित किया था।

पीड़िता के पिता सुभाष चंद ने पुलिस पर आरोप लगते हुए बताया की ‘थाने के पुलिस वाले बात बात पर गालियां देकर बात करते हैं। क्योकि उन्होंने आरोपी परिवार से पैसे लिए हैं, इसलिए हमें गालियां देते हुए कहते हैं कि पैसे की खातिर अपनी बेटियों का बलात्कार करवाते हैं। हमारे लिए ऐसे शब्द इस्तेमाल करते हुए शारीरिक और मानसिक रूप रूप से इतना प्रताड़ित करते हैं की मैं बता भी नहीं सकता.’

परिवार ने पीड़िता की बहन के सूजे हुए गाल की तस्वीरें दिखाई हैं। सुभाष का कहना है, बीते 28 दिसंबर को पुलिस ने हमें सूचित किया था कि हमें थाने में केस के संबंध में बयान देने जाना है। मेरा बेटा अस्पताल में था क्योंकि उसका एक्सीडेंट हुआ था। 8 जनवरी  को मैं घर आया हूं और अगली सुबह मैंने पुलिस से फोन कर समय के बारे में पूछा था। 9 तारीख को ही मेरे फोन के करीब डेढ घंटे बाद पुलिस का फोन आया कि अपनी बेटी व बीवी को लेकर गवाही के लिए थाने आ जाओ। वो आगे कहते हैं, उसी दिन मैं, मेरी पत्नी और मेरी बेटी डेढ बजे के आसपास थाने गए। वहां मेरी बेटी को सीओ और एक महिला पुलिसकर्मी ने पीटा, मुझे भी मारा, हमें गालियां दीं। इस बीच किसी एक्सीडेंट के चलते एसएचओ बाहर चले गए थे। उसके बाद हमें अलग अलग कमरों में 5 घंटे बाद तक थाने में बैठाए रखा।

एसएचओ पवन कुमार शर्मा इस बात को सिरे से नकारते हैं, ‘हमने उनके साथ कोई मारपीट नहीं की है। ये परिवार पिछले एसएचओ के लिए भी बड़े अधिकारियों को इस तरह के प्रार्थना पत्र लिखकर पैसे ऐंठने की कोशिश करता था, मेरे साथ भी यही कर रहे हैं। उस दिन हम एक्सीडेंट के एक केस के चलते बाहर चले गए थे। ये लोग ही पुलिस को धमका रहे थे और नखरे दिखा रहे थे।

बता दें कि पिछले साल 5 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर के बढ़ीवाला गांव की एक 21 वर्षीय लड़की ने आत्महत्या कर ली थी। पीड़िता ने मरने से पहले अपने हाथों पर आरोपियों के नाम लिखे हुए थे। एसएचओ पवन कुमार ने बताया कि इस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है। इससे पहले ये केस एसएसआई सुरेश पाल सिंह के पास था। पवन कुमार शर्मा का तबादला हाल में ही छपार पुलिस थाने हुआ है। जिसके बाद ये केस उन्हें सौंपा गया है। शर्मा के मुताबिक वो इस मामले की शुरुआत से जांच कर रहे हैं। उन्होंने बताया, मैंने लड़की के हाथ पर लिखे मिले सुसाइड नोट को उसकी असली लिखावट से मैच करवाने के लिए आगरा दोबारा जांच शुरू करवाई है।

शर्मा जी ने बताया, मुझे ये केस संदेहास्पद लग रहा था क्योंकि कोई भी अपने पति के दूसरे संबंध बर्दाशत नहीं कर सकती है। अगर ये यकीन भी करें कि लड़की के मामा ने बलात्कार किया है तो ये कैसे यकीन करें कि मामी ने दरवाजा बंद करके ये सब करवाया। एसएचओ के मुताबिक लड़की के परिवार का रिकॉर्ड पैसे लेकर मामले निपटाने का रहा है।

लेकिन एसएचओ की बात पर आपत्ति जताते हुए सुभाष कहते हैं कि पूरा गांव उनके ‘खिलाफ’ हो गया है। आरोपी परिवारों ने हम पर दबाव बनाकर कागजों पर साइन कराने की कोशिशें भी की हैं ताकि ये केस वापस लिया जा सके। मेरी एक बेटी शादी लायक है, उसकी भी शादी करनी है। अगर हम केस वापस लेते हैं तो ये मेरी मरी हुई बेटी के साथ अन्याय होगा। इसलिए इस मामले में पुलिस द्वारा कोई आरोपी गिरफ्तार नहीं होने पर मैंने सहारनपुर के डीआईजी को पत्र लिखकर कहा था कि मैं आत्महत्या कर लूंगा।

लेकिन पुलिस के मुताबिक पीड़ित परिवार ये सब पुलिस को ब्लैकमेल करने के लिए कर रहा है क्योंकि परिवार के खिलाफ पूरा गांव है।

इससे पहले साल 2015 में भी गांव के ही तीन लड़कों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया था। उस दौरान पोक्सो कानून के तहत मामला दर्ज हुआ लेकिन आरोपी जमानत पर बाहर आ गए। लगातार मिल रहे तानों से तंग आकर उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। पीड़िता के पिता अफसोस जताते हुए कहते हैं कि पैसे की कमी और संसाधन के बिना वो केस को आगे तक नहीं ले जा पाए। कई बार पेशी पर नहीं जा सके, इसलिए उनका केस कमजोर होता गया।

उसके बाद पीड़िता के सगे मामा ने भी इस स्थिति का फायदा उठाकर उसके साथ बलात्कार किया था। छपार पुलिस ने पीड़िता की आत्महत्या के बाद धारा 306 के तहत चार लोगों पर मुकदमा दर्ज किया था। तत्कालीन एसएचओ एच एन सिंह ने भी कुछ ऐसे ही आरोप लगाकर परिवार के चरित्र पर शक जाहिर किया था।

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पंजाब :बच्चो की पीड़ाभरी पाठशाला, गलन भरी ठंड में जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं मासूम, टूटी छतें,पानी नहीं और सरकारी स्कूलों में तो स्टाफ तक पूरा नहीं

तस्वीरों में देखिए एक पाठशाला, जहां बच्चे गलन भरी ठंड में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। जबकि इन स्कूलों को स्मार्ट बनाने के नाम पर शिक्षा विभाग को इनाम मिलने जा रहा है। 

नीचे बैठकर पढ़ाई करते स्कूली बच्चे
नीचे बैठकर पढ़ाई करते स्कूली बच्चे

फिरोजपुर जिले में ऐसे सैकड़ों स्कूल हैं, लेकिन शिक्षा विभाग सरकारी प्राइमरी स्कूलों को स्मार्ट बनाने के नाम पर 11 जनवरी को दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होने जा रहा है। गांव अलीके के स्कूल में 349 बच्चों के लिए चार कमरे हैं और 60 बैंच हैं। इनमें से तीस बैंच टूटे हैं। इतने बैंचों पर सिर्फ 120 बच्चे ही बैठकर पढ़ सकते हैं। कमरों की छतें जर्जर हैं, लेकिन रंग-रोगन कर इन्हें चमका दिया गया है। बारिश में छत से पानी रिसता है और क्लास रूम भर जाता है। एक कक्षा में 50 से अधिक बच्चे हैं, जबकि 30 होने चाहिएं। सुबह 10.33 बजे स्कूल पहुंचे तो बच्चे जमीन पर बैठे ठिठुर रहे थे। इसके बाद एक निर्माणाधीन घर में पहुंचे, जहां इसी स्कूल के बच्चों की कक्षाएं छत पर लगी हुई थीं। ग्रामीण सुरजीत सिंह और मंगल सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले स्कूल गांव के गुरुद्वारे में लग रहा था।

नीचे बैठकर पढ़ाई करते स्कूली बच्चे
जर्जर हालत में कमरे की दीवारें

वहीं शिक्षकों का कहना है कि स्मार्ट स्कूल का मतलब स्कूल के सभी कमरों में ई-कंटेंट (स्क्रीन प्रोजेक्ट), दीवारों पर अच्छी तस्वीरें, इंग्लिश मीडियम, बच्चे टाइ-बेल्ट बांधकर आएं, शुद्ध पीने का पानी, फर्नीचर, मजबूत कमरों के अलावा अन्य और चीजें हैं। जो स्कूल इन सभी जरूरतों को पूरी करता हो, उसे स्मार्ट स्कूल कहते हैं। पंजाब के सरकारी स्कूलों में तो स्टाफ ही पूरा नहीं है, उपरोक्त सुविधाएं तो दूर की बात हैं उप जिला शिक्षा अधिकारी (प्राइमरी) सुखविंदर सिंह का कहना है कि 838 प्राइमरी स्कूलों में से 638 को स्मार्ट स्कूल में तब्दील किया है। 656 आरओ लगाए गए हैं, 124 क्लास रूम बनाए गए हैं। 11 शौचालयों का निर्माण किया गया है। 217 अपर प्राइमरी स्कूलों में सेनेटरी नेपकिन वेंडिंग मशीन स्थापित की गई है। 17 करोड़ रुपये खर्च किया गया है। डीईओ ने बताया कि अलीके स्कूल के छह कमरे मंजूर हो चुके हैं। जल्द ही ग्रांट जारी की जाएगी। स्कूलों में स्टाफ भी पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

टूटी हुई कमरे की छत
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मिशाल : पीड़ित बच्ची, माता-पिता मुकरे, अदालत ने फिर भी दुष्कर्मी को सुनाई 14 साल कैद की सजा

आगरा में स्पेशल जज (पोक्सो एक्ट) वीके जायसवाल ने सात साल की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले सफाई कर्मचारी गौरु उर्फ गौरव वाल्मीकि को मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर 14 साल कारावास की सजा सुनाकर एक मिशाल पेश की है। दोषी को डेढ़ लाख रुपये अर्थदंड भी देना होगा। इस केस में बच्ची, उसके माता और पिता ने अदालत में घटना का समर्थन नहीं किया था। गौरू के वकील ने यह भी दलील दी थी कि मेडिकल रिपोर्ट में मामला दुष्कर्म के प्रयास का लगता है। इस पर सरकारी वकील ने कहा कि दुष्कर्म किसी भी हद तक किया जाए, वो दुष्कर्म ही है।

घटना 17 अक्टूबर 2017 को लोहामंडी क्षेत्र में हुई थी। बच्ची सामान लेने के लिए परचून की दुकान पर जा रही थी। पड़ोस का गौरू उसे अपने साथ घर ले गया था। बच्ची के माता-पिता उसके घर पहुंचे तो वो उससे दुष्कर्म कर रहा था। उसे मौके से पकड़ा गया था। उसे जेल भेज दिया गया। जमानत नहीं हुई।

अदालत में पीड़ित बच्ची के माता-पिता ने कहा कि वो मौके पर नहीं गए थे। विशेष लोक अभियोजन विमलेश आनंद ने कोर्ट में मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट रखी। इसके आधार पर उन्होंने कहा कि मामला दुष्कर्म का ही है। 

अभियुक्त का कृत्य गंभीर, घिनौना और शर्मनाक है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कोर्ट में सात गवाह प्रस्तुत किए। अदालत ने मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट और अन्य गवाहों के बयान के आधार पर अभियुक्त को दोष सिद्ध पाया।

गौरू को डेढ़ लाख रुपये अर्थदंड देना होगा। इनमें से 50 हजार रुपये पीड़ित बच्ची को दिए जाने का आदेश अदालत ने दिया है। उसे पोक्सो एक्ट, दुष्कर्म में सजा सुनाई गई है। इनमें अलग-अलग अर्थदंड दिया गया है।

अदालत ने टिप्पणी की है कि अभियुक्त ने काम वासना में अंधा होकर सात वर्षीय बच्ची के साथ घृणित कार्य किया है। उस समय बच्ची को बहुत ही तकलीफ से गुजरना पड़ा होगा। वर्तमान समय में समाज में इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। नाबालिग बच्चियों की अस्मिता व इज्जत से खिलवाड़ किया जा रहा है। इससे सामाजिक मान मर्यादा तारतार होती है व पूरी मानवता व समाज शर्मसार होता है।

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‘घर बैठे पाएं पार्ट टाइम नौकरी’ झांसे में आए लोगों को इस तरह अपना शिकार बनाता था ये शातिर गैंग ….

उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के लोगों को घर बैठे पार्ट टाइम जॉब कर 25 से 30 हजार रुपये कमाने का झांसा देकर ठगी करने वाले गैंग के तीन सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गैंग छह महीने में सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बना चुका है।रजिस्ट्रेशन और जीएसटी के नाम पर खातों में रकम जमा कराई जाती थी। गैंग के दो खातों में तकरीबन दस लाख रुपये के ट्रान्जेक्शन की जानकारी पुलिस को मिली है। गैंग का सरगना अभी फरार है।

दयालबाग निवासी तूलिका गुप्ता से पिछले दिनों ठगी की गई थी। उनसे घर बैठे एक कंपनी में नौकरी लगवाने का झांसा दिया गया। इसके बाद रजिस्ट्रेशन और टैक्स के नाम पर तीन बार में 10800 रुपये जमा करा लिए गए।उन्हें मैनेजर और डायरेक्टर बनकर कॉल किया गया। उनसे कहा गया कि इंडियन सक्सेस मंतरा कंपनी में नौकरी लगवाकर घर बैठे एक घंटे कंप्यूटर में डाटा फीडिंग करनी होगी। इसके लिए हर माह कंपनी 25 से 30 हजार रुपये देगी। ठगी का पता चलने पर तूलिका गुप्ता ने पुलिस से शिकायत की थी। इस पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी। पुलिस के पास और भी शिकायत थी। 

पकड़े शातिर

पुलिस ने मथुरा से तीन आरोपियों को पकड़ लिया गया। इनमें सादाबाद के गांव नौपुरा निवासी योगेश कुमार, अलीगढ़ के इगलास का हरीश कुमार और सादाबाद के गढ़ उमराऊ का रोहिताश शामिल है। साइबर सेल के मुताबिक, गैंग का सरगना मथुरा निवासी सचिन है।

भोला, हरीश और योगेश उसके साथी हैं। योगेश ने अपना बैंक खाता सचिन को किराये पर दिया था। इसके लिए हर महीने तय रकम लेता था। गैंग के सदस्य लोगों के मोबाइल नंबर का डाटा लेते हैं। इसके बाद कॉल करके नौकरी का झांसा देते हैं। रजिस्ट्रेशन कराने पर लोगों से शैक्षिक दस्तावेज मांगते थे। इसके लिए 2160 रुपये लेते थे। लोगों से खातों में रकम जमा कराई जाती है। पकड़ने वाली पुलिस टीम में निरीक्षक विनोद कुमार, एसआई अमित कुमार, सिपाही विजय तोमर, बबलू कुमार, इंतजार सिंह, जितेंद्र हैं। 

पुलिस की पूछताछ में गैंग के छह खातों की जानकारी मिली है। इनमें मथुरा की भारतीय स्टेट बैंक और केनरा बैंक की शाखा के खातों में छह महीने में पांच-पांच लाख रुपये का लेन-देन हुआ है। बाकी चार खातों की डिटेल भी बैंक से मांगी गई है।

गैंग का सरगना सचिन 12वीं पास है। वह छह महीने से गैंग चला रहा है। योगेश के बैंक खातों को किराये पर ले रखा था। जिन नंबरों से कॉल की जाती थी, उनको ठगी के कुछ समय बाद बंद कर दिया जाता है। इसके लिए फर्जी आईडी पर सिम लेते थे। योगेश की मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान है। हरीश काम नहीं करता है। सचिन ही खातों से रकम निकालता था।

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कन्नौज हादसा: बस में चीख पुकार सुन कांप रहा था कलेजा, जिंदा जलीं 20 से ज्यादा जिंदगियां,

दिल्ली-कानपुर जीटी रोड पर कन्नौज जिले के घिलोई के पास आमने-सामने भिड़ंत के बाद ट्रक और स्लीपर बस में आग लग जाने से दोनों ही वाहन धू-धूकर जल उठे। बस में करीब 50 यात्री थे। इनमें से 10 ने किसी तरह कूदकर जान बचाई। बाकी के बस में फंसे होने का अंदेशा जताया जा रहा है। रात करीब साढ़े आठ बजे हादसे के बाद जीटी रोड के दोनों तरफ लंबा जाम लग गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीएम और एसपी को मौके पर तुरंत जाने के निर्देश दिए। दोनों प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। 

फर्रुखाबाद की स्लीपर बस गुरसहायगंज से सवारियां लेकर जयपुर जा रही थी। छिबरामऊ से करीब चार किलोमीटर दूर ग्राम घिलोई के पास बेवर की तरफ से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक से भिड़ंत होते ही दोनों वाहनों में आग लग गई। आग इतनी जल्दी विकराल हो उठी कि बस में सवार यात्रियों को संभलने का मौका नहीं मिला। कुछ ही देर बाद बस में एक के बाद एक तीन विस्फोट हुए। अचानक बस में हुए विस्फोट के बाद कोई भी पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। बस से यात्रियों की चीखें सुन लोगों का कलेजा कांप गया। बस में घायल अवस्था में निकले यात्री रामप्रकाश पुत्र ईश्वर दयाल ने बताया कि हादसे के बाद बस में विस्फोट हो गया। इससे सवारियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका।

ट्रक व स्लीपर बस में आमने-सामने की भिड़ंत के बाद लगी आग की जानकारी पर नगर के अलावा आसपास के क्षेत्र से हजारों की संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। हर कोई बस में फंसे लोगों को बचाना चाहता था, लेकिन आग की भयंकर लपटें देख कोई भी पास में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने बस के आसपास लोगों के जाने पर पाबंदी लगा दी। घटना स्थल पर हजारों लोगों की भीड़ दिखाई तो दे रही थी लेकिन सभी तमाशबीन बने हुए थे।
जीटी रोड पर ट्रक व स्लीपर बस में आमने-सामने की टक्कर के बाद आग लगने की सूचना ग्रामीणों ने अफसरों व दमकल को दे दी। सूचना देने के आधा घंटा बाद दमकल मौके पर पहुंची लेकिन कुछ ही देर में पानी खत्म हो गया। बस में सवारियां जल रही थीं और पानी खत्म होने से दमकल लौट गई।

हादसे के बाद स्लीपर बस में सवारियां जल रही थीं। लोगों की मदद के प्रशासन के तमाम इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे थे। दमकल पानी खत्म होने से लौट गई। इसके बाद आग पर काबू पाने के लिए पड़ोसी जनपद मैनपुरी से दमकल मंगाई गई। इसके बाद आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि स्लीपर बस में जब आग की लपटें रौद्र रूप धारण कर रही थीं, उसी समय एक मासूम बच्चा बस की खिड़की की तरफ आ गया। लोगों ने उसे कूदने के लिए कहा, वह बार-बार बस के अंदर फंसी अपनी मां की तरफ इशारा कर रहा था। तभी धमाके के साथ आग और विकराल हो गई और बच्चे को आगोश में ले लिया। ट्रक और स्लीपर बस में आग लग जाने से दोनों वाहन धू-धूकर जल उठे। बस में करीब 45 यात्री थे। कई ने कूदकर जान बचाई, वहीं हादसे में 20 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। 

डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि बस या ट्रक में से किसी एक में कोई ज्वलनशील पदार्थ था। जिससे धमाके के साथ आग लगी। जिससे धमाके के साथ आग लगी। वहीं, प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस अपनी दिशा में बेवर की तरफ जा रही थी। बेवर की तरफ से आने वाला ट्रक विपरीत दिशा में था। ट्रक चालक की लापरवाही के कारण यह हादसा हो गया। हादसे के बाद बस से आग की लपटें उठने लगीं। यहां पर मौजूद ग्रामीणों ने सवारियों को बचाने का प्रयास किया। बस में एक के बाद एक दो धमाके हुए इससे लोगों की हिम्मत टूट गई। घिलोई में दुर्घटना बहुल क्षेत्र गति सीमा बीस किलोमीटर प्रति घंटा के लगे चेतावनी बोर्ड के ठीक सामने यह हादसा हुआ। बोर्ड में भारतीय राष्ट्रीय प्राधिकरण की ओर से  इस स्थान को दुर्घटना स्थल बताया गया है। वाहन चालकों को यहां पर धीमे चलने की चेतावनी दी गई है। इसे महज संयोग ही कहा जाएगा कि दुर्घटना की चेतावनी देने वाले बोर्ड के सामने ही हादसा हो गया।

बुझने के बाद फिर सुलगी आग
दमकल टीम ने रात साढ़े दस बजे के लगभग आग पर काबू पा लिया। जैसे ही प्रशासनिक अफसरों ने बस के अंदर जाने का प्रयास किया, एक बार फिर आग सुलगने लगी। इसके बाद लोगों को पीछे किया गया। फायर ब्रिगेड ने फिर से आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू कर दिए। ट्रक से भिड़ंत के बाद स्लीपर बस में आग लगी तो अपनी जान को बचाने के प्रयास में कई सवारियां बस की खिड़कियों से नीचे कूद गईं। इससे उन्हें चोटें आई। घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए प्रशासन से लगभग एक दर्जन एंबुलेंसों की व्यवस्था की गई थी।

कन्नौज डीएम रवीन्द्र कुमार ने बताया मौके पर राहत और बचाव कार्य शुरु करवा दिया गया है। बस में 45 सवारियां थीं। इसमें दो स्टाफ के लोग भी शामिल थे। जिसमें से 17 सवारियां छिबरामऊ से बैठी थी और 26 सवारियां गुरसहायगंज से बैठी थीं। जिसमें से अभी तक सिर्फ 21 घायल सवारियों को अस्पातालों में भर्ती किया गया है।  दमकल की मौके पर पहुंची एक गाड़ी का पानी खत्म होने पर दूसरी आने ही वाली थी कि बस में एक के बाद एक तीन धमाकों से हड़कंप मच गया। करीब 12-15 यात्रियों ने बस का सीसा तोड़ किसी तरक कूदकर अपनी जान बचाई। घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। वहीं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए अफसरों को तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरु करने के निर्देश दिए। उन्हाेंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

शुक्रवार रात 8.30 बजे के करीब जीटी रोड पर ग्राम घिलोई के पास फर्रुखाबाद से जयपुर जा रही स्लीपर बस की कोहरे के कारण सामने से आ रहे ट्रक से जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे के बाद ट्रक में आग लग गई, जिसने बस को भी चपेट में ले लिया। थोड़ी ही देर में बस आग का गोला बन गई। हादसे में स्लीपर कोच बस में सवार कई यात्रियों के मरने की आशंका है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का डीजल टैंक फट गया। जिससे एक के बाद एक धमाके हुए और आग विकराल होती गई। आग की लपटें देख बस में बैठे यात्रियों में बाहर निकलने को लेकर हंगामा मच गया। बस में सवार करीब 45 से अधिक यात्रियों में लगभग 12-15 ही बाहर निकल सके। मौके पर फायर बिग्रेड, अपर जिलाधिकारी गजेंद्र सिंह व अपर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार, छिबरामऊ कोतवाल शैलेंद्र कुमार मिश्रा पहुंचे हैं।

मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ मौजूद है और जीटी रोड पर यातायात पूरी तरह बाधित है। जाम में दर्जनों वाहन फंसे हुए हैं। वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। फायर बिग्रेड की कई गाड़ियाें ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।  देर रात करीब 11.15 पर आग बुझाई जा सकी। बस में कितने यात्री आग की चपेट में आकर मरे हैं, इसकी जानकारी नहीं हो सकी है। ट्रक व स्लीपर बस की आमने-सामने की टक्कर के बाद जैसे ही बस में आग लगी, कुछ सवारियों ने खिड़कियों के कांच तोड़कर बस से कूदकर अपनी जान बचाई। हादसे में घायल 21 यात्रियों को सौ शय्या अस्पताल में भर्ती कराया गया।14 यात्रियों को रेफर कर दिया गया। पांच राजकीय मेडिकल कॉलेज तिर्वा में भर्ती हुए हैं।

ये हैं 21 घायल
हादसे में ग्राम चांदापुर निवासी रणसिंह पुत्र भीम सिंह, सौरिख निवासी रामबाबू चौरसिया पुत्र प्रेमबाबू, रितिक पुत्र मनोज, ग्राम कुतुबपुर निवासी ओमवीर पुत्र सुरेश चंद्र व इनकी पत्नी खुशबू, ग्राम नगला जैदी निवासी ब्रजमोहन पुत्र तुलाराम शाक्य, रूपपुर खड़िनी निवासी शकील पुत्र शैनूर खां, कन्नौज निवासी लईक पुत्र जमील अहमद, सलमान पुत्र मुश्ताक, मोहल्ला बजरिया निवासी रमन गुप्ता पुत्र राजेश गुप्ता, शोएब पुत्र इकबाल खां, उमरापुर निवासी छम्मेलाल पुत्र रामऔतार, राजीव पुत्र नंदराम, मोहल्ला शास्त्रीनगर निवासी सुधीर बाबू पुत्र जयवीर सिंह, रेशू पुत्र दिनेश, ग्राम धीरपुर निवासी विमलेश पुत्र राकेश चंद्र, ग्राम हरदेव नगला निवासी अर्जुन पुत्र ग्रीश, मोहल्ला बस्तीराम निवासी खुशू पुत्र राकेश यादव, ग्राम जरौली हरदोई निवासी रामप्रकाश पुत्र ईश्वरीन, ग्राम जुनैदपुर निवासी नर सिंह पुत्र स्वरूप सिंह व ग्राम मलौथा हरदोई निवासी जितेंद्र पुत्र रामस्वरूप घायल हो गए।

कानपुर रेंज के आईजी मोहित अग्रवाल ने बताया कि बस में करीब 45 लोग थे। 25 लोगों को बचा लिया गया, इनमें से 12 को मेडिकल कॉलेज तिर्वा और 11 को जिला अस्पताल भेजा गया। दो लोग पूरी तरह सुरक्षित थे जिन्हें उनके घर भेज दिया गया। 18 से 20 लोग लापता हैं, संभवत: उनकी मृत्यु हो गई हो लेकिन यह अभी निश्चित नहीं है।आईजी ने कहा कि, शव बुरी तरह जले हुए हैं, हड्डियां तक बिखरी हुई हैं, केवल डीएनए टेस्ट से ही मृतकों की सही संख्या बताई जा सकती है। पहली नजर में 8 से 10 लोगों के शव बस में होने की आशंका है लेकिन हादसा इतना भीषण था कि मृतकों की संख्या डीएनए टेस्ट से ही तय की जा सकती है।

कन्नौज में हुए हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया।  उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए लिखा-उत्तर प्रदेश के कन्नौज में हुए भीषण सड़क हादसे के बारे में जानकर अत्यंत दुख पहुंचा है। इस दुर्घटना में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। मैं मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करता हूं, साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।

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Chhapaak Review: एक लड़की के साथ भयभया कराने वाली घटना कभी रुलाती तो कभी डराती है-छपाक मूवी

  • फिल्म: छपाक
  • कलाकार:Deepika Padukone, Vikrant Massey, Ankit Bisht, Madhurjeet Sarghi
  • निर्देशक:Meghna Gulzar
  • रेटिंग : ****

सिर्फ इस देश में ही नहीं, इस दुनिया में एक लड़की होना आसान बात नहीं है। हम रोज ना जाने कितनी बातों का सामना करते हैं, जिनमें से कई चीजों के बारे में किसी से बात करने में भी हम हिचकिचाते हैं। हम सभी के मन में रोज अलग डर होता है. शाम को बाहर ना जाना, कपड़ें ढंग से पहनना और भी बहुत सी बातें या तो हमें कही जाती हैं या फिर खुद हम ही सोचने लगते हैं।

आप नहीं जानते आपके साथ क्या होने वाला है। रेप से डर सभी को लगता है, हर लड़की को. लेकिन जिस बात पर हम कम ही ध्यान देते हैं वो है एसिड अटैक। किसी की सूरत के साथ-साथ उनकी पूरी जिंदगी बिगाड़ देने वाला ये दुष्कर्म हमारे देश में ना जाने कितनी लड़कियों के साथ हुआ है. ऐसी ही एक लड़की है लक्ष्मी अग्रवाल, जिसकी जिंदगी से प्रेरित होकर डायरेक्टर मेघना गुलजार ने अपनी फिल्म छपाक को बनाया है।

फिल्म की कहानी

फिल्म छपाक की कहानी दिल दहला देने वाली है. ये कहानी है मालती अग्रवाल (दीपिका पादुकोण) की, जिसपर एसिड से अटैक किया गया है। मालती का पूरा चेहरा जल चुका है और उसकी जिंदगी तबाह हो गई है। लोगों का शक उसके बॉयफ्रेंड राजेश (अंकित बिष्ट) पर जाता है, लेकिन मालती का गुनहगार राजेश नहीं बल्कि उसी का जानकार बब्बू उर्फ बशीर खान और उसकी रिश्तेदार परवीन शेख है। 19 साल की मालती की मदद में आगे आती है उसके पिता की मालकिन शिराज और उनकी वकील अर्चना (मधुरजीत सरघी). अर्चना, मालती का केस लड़ती है और उसे न्याय दिलाने के लिए मेहनत करती है। वहीं मालती की मुलाकात होती है अमोल से, जो अपनी पत्रकार की नौकरी छोड़कर एसिड अटैक सर्वाइवर्स के इलाज के लिए NGO चला रहा है। मालती और अमोल साथ काम करते हैं और प्यार में पड़ जाते हैं।

परफार्मेंस

दीपिका पादुकोण ने इस फिल्म में कमाल कर दिखाया है।ये उनकी अभी तक की सबसे बेस्ट परफॉर्मेंस है, जिसे देखकर आपको बहुत कुछ महसूस होगा। मालती के किरदार में आपको दर्द, खुशी, हिम्मत सबकुछ देखने को मिलेगा. मालती पर अटैक होना, उसका पहली बार अपने आप को आईने में, अपनी लड़ाई लड़ना और छोटी-छोटी जीत पर खुश होना, दीपिका ने हर सीन में जान डाली है। हालांकि उनका एक स्कूल की लड़की बनना आपको थोड़ा सा खटकेगा।वहां वो थोड़ी सी वीक थीं। विक्रांत मैसी अपनी जगह जबरदस्त हैं। उनका किरदार में ढलना, डायलॉग्स और लुक बहुत बढ़िया है। दीपिका के साथ उनकी जोड़ी भी अच्छी जमी है। विक्रांत ने एक बार फिर से साबित किया है कि उन्हें इंडस्ट्री में और ज्यादा अच्छा काम मिलना दर्शकों के लिए जरूरी है। आपको विक्रांत से आराम से प्यार हो सकता है।

विक्रांत और दीपिका के अलावा फिल्म के बाकी एक्टर्स अंकित बिष्ट, मधुरजीत सरघी संग देवस दीक्षित और अन्य सपोर्टिंग एक्टर्स ने बढ़िया काम किया है। इसके अलावा असल जिंदगी की एसिड अटैक सर्वाइवर ऋतू, बाला, जीतू और कुंती, जो कि फिल्म की शीरो यानी हीरो हैं, का काम भी अच्छा है।

डायरेक्शन

डायरेक्टर मेघना गुलजार किसी भी बड़ी से बड़ी कहानी को आराम और सलीके से जनता के सामने परोसना जानती हैं। छपाक जैसी दर्दनाक कहानी को बहुत खूबसूरती से बड़े पर्दे पर उतारा है। फिल्म का डायरेक्शन बहुत उम्दा है. इसकी सिनेमेटोग्राफी, म्यूजिक, एडिटिंग और प्रोस्थेटिक्स बहुत कमाल है। गुलजार के लिखे लिरिक्स और अरिजीत सिंह की आवाज आपको अंदर तक कचोटती है।

ये फिल्म आपको बहुत सारी चीजें महसूस करवाती है, जिसमें डर सबसे बड़ा है. इसी के साथ ये आपकी आंखें खोलने का काम भी करती है कि कैसे एसिड अटैक जैसा घिनौना अपराध आज भी हो रहा है और कितनी लड़कियों की जिंदगी बर्बाद हो रही है। छपाक को देखने के बाद आप अपनी भावनाओं को नहीं रोक पाएंगे. तो आपको दीपिका पादुकोण की छपाक जरूर देखनी चाहिए!

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यूपी पुलिस का सामने आया अमानवीय चेहरा , वायरल वीडियो में चार पुलिसवालों ने युवक पर दिखाई बेरहमी?

उत्तरप्रदेश पुलिस का एक बार फिर काला चेहरा देवरिया जिले में सामने आया। यहां मदनपुर थाने में एक युवक की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें तीन पुलिसकर्मी और एक हेड कांस्टेबल युवक की बेरहमी से पिटाई कर रहे हैं। वह महेन गांव का रहने वाला युवक मनुहार करता रहा, लेकिन पुलिसवाले पिटाई करते रहे।

मामले का संज्ञान लेते हुए एसपी ने सीओ रुद्रपुर दिनेश सिंह यादव से जांच कराई। जांच में मामला सही पाए जाने पर हेड कांस्टेबल लालबिहारी, कांस्टेबल चंद मौलेश्वर सिंह और डायल-112 में तैनात सिपाही जितेंद्र यादव को निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए थे। एसपी के आदेश पर दिवसाधिकारी रमाशंकर यादव ने तीनों के खिलाफ मदनपुर थाने में युवक की पिटाई करने का केस दर्ज कराया है। एसपी डॉ. श्रीपति मिश्र ने बताया कि निलंबित किए गए तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज करा दिया गया है। अब आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि महेन निवासी सुमित गोस्वामी को मदनपुर पुलिस बुधवार की दोपहर पकड़कर थाने ले गई। थाने में उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। युवक उनसे मिन्नतें करता रहा, लेकिन पिटाई करने वाले सिपाही लगातार मारते रहे।  किसी ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। मामले की जानकारी एसपी को दी गई। एसपी ने मामले की जांच सीओ रुद्रपुर से कराई। वीडियो देखने के बाद एसपी ने सीओ रुद्रपुर दिनेश सिंह यादव को मौके पर जांच के लिए भेजा। जांच में मामला सही पाया गया। उनकी रिपोर्ट के आधार पर हेड कांस्टेबल लाल बिहारी कांस्टेबल चंद्रमौलेश्वर सिंह और डायल 112 के सिपाही जितेंद्र यादव को निलंबित कर दिया गया। तीनों के खिलाफ केस दर्ज कराने की तैयारी है। एसपी डॉक्टर श्रीपति मिश्र ने बताया की तीनों को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ केस दर्ज कराकर कार्रवाई की जाएगी।